[1]
“आधुनिक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रामचरितमानस के नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता”, ss, vol. 4, no. 1, pp. 331–334, Sep. 2026, doi: 10.64880/shikshasamvad.v4i1.38.