[1]
“मजदूर एवं कृषक वर्ग की समस्याएँ: नागार्जुन और रेणु का साहित्यिक परिप्रेक्ष्य”, ss, vol. 4, no. 1, pp. 70–78, Sep. 2026, doi: 10.64880/shikshasamvad.v4i1.08.