आत्मनिर्भर भारत की दिशा में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था: चुनौतियाँ, संभावनाएँ एवं सुधार
Author : डॉ. संतोष कुमार भारती
सारांश (Abstract)
आत्मनिर्भर भारत का विचार केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वर्तमान समय में शिक्षा किसी भी राष्ट्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति में ज्ञान, कौशल, नैतिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक चेतना का विकास होता है। आधुनिक भारत में शिक्षा व्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। वैश्वीकरण, उदारीकरण, डिजिटलीकरण, तकनीकी विकास तथा नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है। प्रस्तुत शोध पत्र में आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की भूमिका, भारतीय संविधान के आदर्श, लोकतांत्रिक मूल्यों, आधुनिकीकरण, तकनीकी विकास, रोजगारपरक शिक्षा तथा वर्तमान शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों और संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा व्यवस्था किस प्रकार भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हो सकती है।
मुख्य शब्द (Key word): आत्मनिर्भर भारत, शिक्षा व्यवस्था, आधुनिकीकरण, लोकतंत्र, नई शिक्षा नीति, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, रोजगारपरक शिक्षा।
Cite this Article:
डॉ. संतोष कुमार भारती, “आत्मनिर्भर भारत की दिशा में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था: चुनौतियाँ, संभावनाएँ एवं सुधार” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.267-280, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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