राजेंद्र यादव और अमरकांत के साहित्य में दलित, स्त्री एवं निम्नवर्गीय विमर्श : सामाजिक चेतना के बहुआयामी संदर्भ
DOI:- https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.50
Author(s): 1राजेश मीना, 2डॉ. रीतु शर्मा
शोध सारांश
राजेंद्र यादव और अमरकांत हिंदी कथा-साहित्य के ऐसे महत्वपूर्ण रचनाकार हैं जिन्होंने भारतीय समाज के वंचित, उपेक्षित और शोषित वर्गों के जीवन-संघर्षों को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। प्रस्तुत शोध-पत्र में दोनों लेखकों के साहित्य में दलित, स्त्री एवं निम्नवर्गीय विमर्श के विविध आयामों का विश्लेषण किया गया है। राजेंद्र यादव की रचनाएँ सामाजिक संरचनाओं में निहित लैंगिक एवं जातिगत असमानताओं पर तीखा प्रश्न उठाती हैं, जबकि अमरकांत का साहित्य निम्नवर्गीय जीवन की यथार्थपरक अभिव्यक्ति तथा मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज प्रस्तुत करता है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि दोनों साहित्यकार सामाजिक चेतना के विकास, मानवीय गरिमा की स्थापना तथा सामाजिक न्याय के पक्षधर हैं। उनके साहित्य में शोषण, दमन, असमानता और प्रतिरोध के स्वर सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। इस प्रकार उनका कथा-साहित्य समकालीन सामाजिक विमर्शों को समझने का महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
मुख्य शब्द—राजेंद्र यादव, अमरकांत, दलित विमर्श, स्त्री विमर्श, निम्नवर्गीय चेतना, सामाजिक न्याय, सामाजिक चेतना, हिंदी कथा-साहित्य, वंचित वर्ग, सामाजिक परिवर्तन।
Cite this Article:
1राजेश मीना, 2डॉ. रीतु शर्मा, “राजेंद्र यादव और अमरकांत के साहित्य में दलित, स्त्री एवं निम्नवर्गीय विमर्श : सामाजिक चेतना के बहुआयामी संदर्भ” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.488- 498, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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