तहसील सगड़ी में भूमि उपयोग प्रतिरूप
DOI:- https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.67
Author (s): जितेन्द्र यादव1, डॉ. शिव शंकर2
सारांश
भूमि से ही मानव की अधिकांश मूलभूत आवश्यकताएँ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पूरी होती हैं। किसी क्षेत्र विशेष के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में भूमि का सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान होता है। मृदा धरातल की ऊपरी सतह का आवरण है, जिसमें वनस्पतियों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण खनिज लवण रासायनिक तथा पौष्टिक पदार्थ रहते हैं। भूमि की इस पतली परत से ही मानव जनसंख्या और अन्य सजीवों के भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। संसाधन के रूप में भूमि से बढ़कर कोई वस्तु जीव समुदाय के लिए नहीं है। भूमि संसाधन के अभाव में किसी भी अन्य प्राकृतिक संसाधन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। प्रत्येक दृष्टिकोण से अवलोकन करने पर यह महसूस होता है कि मनुष्य ही नहीं बल्कि प्रत्येक वस्तु भी मृदा की संतान है। मृदा को ही प्राकृतिक वातावरण का प्रमुख तत्व कहा गया है, मिट्टी धरातल की मृत धूल को जीवन के सातत्य से जोड़ती है।1 यह धरातल के बाह्य आवरण का ऐसा पदार्थ है, जो दृढ़ीभूत नहीं हुआ है, और इसमें पूरे जीव समुदाय के जीवन के अनुपोषण की क्षमता होती है।
मुख्य बिन्दु-भूमि उपयोग, भूमि उपयोग प्रतिरूप, कृषि भूमि उपयोग, भूमि सर्वेक्षण।
Cite this Article:
यादव, जितेन्द्र, शंकर, डॉ. शिव (2026). तहसील सगड़ी में भूमि उपयोग प्रतिरूप. Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, 3(4) 635-643, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, June-2026.
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