बाल-सुधार गृहों में रहने वाले बाल-अपराधियों की शैक्षिक अभिवृत्ति एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य सम्बन्ध का अध्ययन
Author(s) :मनीष कुमार मिश्र, प्रो० आर०पी० मिश्र,
सारांश
प्रस्तुत शोध पत्र बाल सुधार गृहों में रहने वाले बाल-अपराधियों की शैक्षिक अभिवृत्ति एवं उनकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य संबंध एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समकालीन विषय पर आधारित है, जो शिक्षा एवं मनोविज्ञान के समन्वित दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है। प्रस्तावना में यह स्पष्ट किया गया है कि बाल-अपराध केवल कानूनी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों का परिणाम है। प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे गरीबी, अशिक्षा, पारिवारिक विघटन एवं सामाजिक उपेक्षा के कारण बालक अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण बाल सुधार गृहों की स्थापना की गई है, जहाँ इन बच्चों को दंड देने के स्थान पर शिक्षा, मार्गदर्शन एवं पुनर्वास के अवसर प्रदान किए जाते हैं। अध्ययन में शैक्षिक अभिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण कारक माना गया है, जो यह निर्धारित करता है कि बालक शिक्षा के प्रति कितना सकारात्मक या नकारात्मक दृष्टिकोण रखता है, और यह अभिवृत्ति उनकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से गहराई से प्रभावित होती है। सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवार की आय, माता-पिता की शिक्षा, व्यवसाय, पारिवारिक वातावरण एवं संसाधनों की उपलब्धता जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो बालकों के दृष्टिकोण एवं व्यवहार को प्रभावित करते हैं। अध्ययन की आवश्यकता एवं महत्व इस तथ्य में निहित है कि यदि बाल अपराधियों की शैक्षिक अभिवृत्ति सकारात्मक बनाई जाए, तो उनके पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है और उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित किया जा सकता है। इस शोध में गोरखपुर मण्डल के बाल सुधार गृहों में रहने वाले 210 बाल-अपराधियों (110 नगरीय एवं 100 ग्रामीण) को नमूने के रूप में लिया गया तथा प्रश्नावली के माध्यम से आँकड़ों का संग्रह किया गया। अध्ययन के उद्देश्यों के अनुरूप नगरीय एवं ग्रामीण दोनों वर्गों के बाल अपराधियों की शैक्षिक अभिवृत्ति एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य संबंध का परीक्षण किया गया। परिकल्पनाओं के विश्लेषण से यह ज्ञात हुआ कि नगरीय बाल अपराधियों में सहसम्बन्ध का मान 0.64 तथा ग्रामीण बाल अपराधियों में 0.51 प्राप्त हुआ, जो दोनों ही स्थितियों में 0.01 स्तर पर सार्थक पाया गया। यह परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि दोनों चरों के मध्य धनात्मक एवं महत्वपूर्ण सहसम्बन्ध विद्यमान है, अर्थात जिन बालकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होती है, उनकी शैक्षिक अभिवृत्ति भी अधिक सकारात्मक होती है। अध्ययन के निष्कर्ष यह सिद्ध करते हैं कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ बाल-अपराधियों की शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं और यही उनके पुनर्वास की सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः यह आवश्यक है कि बाल सुधार गृहों में शिक्षा प्रदान करते समय बच्चों की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखा जाए तथा उनके लिए उपयुक्त, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायक शैक्षिक कार्यक्रम विकसित किए जाएँ। इस प्रकार, यह अध्ययन न केवल बाल-अपराध की समस्या को समझाने में सहायक है, बल्कि एक समावेशी एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।
मुख्य शब्दः-बाल-सुधार गृह, बाल अपराधी, शैक्षिक अभिवृत्ति, सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति
Cite this Article:
मिश्र, मनीष कुमार , मिश्र, प्रो० आर०पी०. (2026). बाल-सुधार गृहों में रहने वाले बाल-अपराधियों की शैक्षिक अभिवृत्ति एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य सम्बन्ध का अध्ययन. Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, Pp.402-409, March-2026. Journal, URL: https://shikshasamvad.com/License
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