‘महाभारत’: एक त्रिगुणात्मक पैरेंटिंग गाइड ‘MAHABHARAT’ A TRIGUNA-BASED PARENTING GUIDE
Author: डॉ. बी. वी. एन. उमा गायत्री
प्रस्तावना-
क्या हज़ारों सालों पहले लिखा गया कोई महाकाव्य आज के ‘डिजिटल युग’ में आपके बच्चे के भविष्य को संवार सकता है? जवाब है- हाँ। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, स्क्रीन टाइम और पीयर प्रेशर के दौर में अभिभावकत्व या पैरेंटिंग एक बेहद जटिल काम हो चुका है। ऐसे में हमारे पौराणीक और ऐतिहासिक ग्रंथ इस दिशा में हमारा मार्गदर्शन करने में अत्यंत सहायक होते हैं। इस मार्गदर्शन को समझने के लिए हमें इस चश्मे से उनको पढ़ना आना चाहिए। ऐसा ही एक ऐतिहासिक महाकाव्य है महाभारत। महाभारत न केवल एक भारतीय धर्म ग्रंथ या एक युद्ध ग्रंथ है बल्की मानव मूल्यों, संबंधों और कर्तव्यों (धर्म) का एक जटिल ताना-बाना है। इस ग्रन्थ में ‘मातृ धर्म’ और ‘पितृ धर्म’ को केवल जैविक (Bioolgical) दायित्व नहीं, बल्कि आत्मा के विकास की सीढ़ी माना गया है।
भारतीय दर्शन और मनोविज्ञान (Psychology) में मानव मन के सभी मनोविकारों को सत्त्व, रज और तम नामक तीन प्रकार के गुणों में समाहित करके उन्हें ‘त्रिगुण’ कहा गया है। सांख्य दर्शन और स्वयं महाभारत के अंश ‘भगवद्गीता’ के अनुसार, ये तीन गुण केवल ब्रह्मांड की प्रकृति के मूल तत्व नहीं हैं, बल्कि ये मानव मन और व्यवहार को संचालित करने वाले मुख्य स्तंभ भी हैं-
“सत्त्वं रजस्तम इति गुणाःप्रकृतिसंभवाः।
निबध्नंति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्।।”[i]
आधुनिक भाषा में कहें तो त्रिगुण हमारी मानसिक प्रक्रिया को संचालित करती हैं, जो हमारे दुनिया को देखने के नज़रिए, निर्णयात्मक बुद्धि और परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया (React) देने के तरीकों को तय करती हैं। मनुष्य के भीतर ये तीनों गुण हमेशा मौजूद रहते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति में समय और परिस्थिति के अनुसार कोई एक गुण प्रधान होता है।
[i] ‘श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप’- भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट, अध्यय 14, पृष्ठ 492, श्लोक 5
Cite this Article:
डॉ. बी. वी. एन. उमा गायत्री, “‘महाभारत’: एक त्रिगुणात्मक पैरेंटिंग गाइड ‘MAHABHARAT’ A TRIGUNA-BASED PARENTING GUIDE” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.356- 363, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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