भारत–नेपाल संबंधों में चीन की बढ़ती भूमिका: सामरिक, आर्थिक एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों का अध्ययन
DOI:- – https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.81
Author(s) डॉ. महेंद्र प्रताप यादव1, सतीश कुमार दूबे2
सारांश
भारत और नेपाल के संबंध दक्षिण एशिया की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट स्थान रखते हैं। दोनों देशों के बीच भौगोलिक निकटता, ऐतिहासिक संपर्क, सामाजिक-सांस्कृतिक समानताएँ, आर्थिक निर्भरता तथा लोगों के बीच गहरे संबंधों ने द्विपक्षीय संबंधों को एक विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध तथा नागरिकों का पारस्परिक आवागमन दोनों देशों के संबंधों को केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं रहने देता, बल्कि इन्हें जन-से-जन संबंधों का स्वरूप प्रदान करता है। वर्ष 1950 की भारत–नेपाल शांति एवं मैत्री संधि ने दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों को संस्थागत आधार प्रदान किया। इसके पश्चात व्यापार, ऊर्जा, जल संसाधन, सुरक्षा, परिवहन तथा विकास सहयोग के अनेक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार हुआ है। हालाँकि, वर्तमान समय में भारत–नेपाल संबंधों को केवल द्विपक्षीय दृष्टिकोण से समझना पर्याप्त नहीं है। नेपाल की भौगोलिक स्थिति भारत और चीन दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नेपाल एक ओर भारत के साथ लंबी खुली सीमा साझा करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी उत्तरी सीमा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इस कारण नेपाल हिमालयी भू-राजनीति तथा भारत–चीन सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र बन गया है। विशेष रूप से पिछले कुछ दशकों में चीन ने नेपाल में अपनी आर्थिक, राजनीतिक, कूटनीतिक एवं अवसंरचनात्मक उपस्थिति को बढ़ाया है। सड़क, रेल, ऊर्जा, पर्यटन, संचार तथा अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में चीन की सक्रियता ने नेपाल की विदेश नीति और क्षेत्रीय भू-राजनीति को प्रभावित किया है। चीन की Belt and Road Initiative (BRI) में नेपाल की भागीदारी ने भारत–नेपाल संबंधों में एक नया सामरिक आयाम जोड़ दिया है। चीन द्वारा नेपाल के साथ सीमा-पार संपर्क तथा अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों को जहाँ नेपाल आर्थिक विकास और वैकल्पिक संपर्क के अवसर के रूप में देखता है, वहीं भारत के लिए इसके सुरक्षा एवं सामरिक निहितार्थ भी महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियाँ, तिब्बत से संबंधित सुरक्षा प्रश्न, सीमा-पार कनेक्टिविटी तथा नेपाल की विदेश नीति में संभावित चीनी प्रभाव भारत की सुरक्षा-चिंताओं को प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही नेपाल स्वयं भी भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता रहा है। नेपाल के लिए भारत पारंपरिक आर्थिक एवं सामाजिक साझेदार है, जबकि चीन उसके लिए निवेश, अवसंरचना और वैकल्पिक व्यापारिक संपर्क का महत्वपूर्ण स्रोत बन रहा है। इसलिए नेपाल की विदेश नीति में दोनों शक्तियों के बीच संतुलन स्थापित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। दूसरी ओर, भारत के सामने यह प्रश्न है कि वह नेपाल के साथ अपने ऐतिहासिक एवं जन-आधारित संबंधों को मजबूत करते हुए चीन की बढ़ती भूमिका से उत्पन्न सामरिक चुनौतियों का किस प्रकार सामना करे। भारत–नेपाल संबंधों में चीन की बढ़ती भूमिका का अध्ययन केवल द्विपक्षीय संबंधों का विषय नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति, हिमालयी सुरक्षा, भारत–चीन प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। अतः प्रस्तुत अध्ययन भारत–नेपाल संबंधों के ऐतिहासिक आधार, चीन की बढ़ती उपस्थिति, उसके सामरिक एवं आर्थिक प्रभाव तथा भारत के लिए उत्पन्न चुनौतियों और संभावित नीति विकल्पों का विश्लेषण करने का प्रयास करता है।
Cite this Article:
यादव, डॉ. महेंद्र प्रताप, दूबे, सतीश कुमार. (2026). भारत–नेपाल संबंधों में चीन की बढ़ती भूमिका: सामरिक, आर्थिक एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों का अध्ययन. Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, 3(4) 746-752, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, June-2026. DOI: – https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.81
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