Shiksha Samvad

Shiksha Samvad

International Journal of Multidisciplinary Research

International Open Access, Peer-reviewed & Refereed Journal | ISSN: 2584-0983 (Online)

Call for Paper: Vol. 3 – Issue 4 – June 2026 (Last Date- 30 June 2026)

संकाय के आधार पर बी0एड0 स्तर के विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि तथा समायोजन के मध्य सह-सम्बन्ध

Vol. 03, Issue 03, pp. 92–98 |  Published: 15 March 2026

Author : डाॅ0 विवेक कुमार

DOI:– https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i3.09

सारांश
प्रस्तुत अध्ययन में ‘‘संकाय के आधार पर बी0एड0 स्तर के विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि तथा समायोजन के मध्य सह-सम्बन्ध’’ है। प्रस्तुत अध्ययन कार्य मंे वर्णनात्मक अनुसंधान के अन्तर्गत सहसम्बन्धात्मक सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन कार्य में जनसंख्या का आशय प्रयागराज जनपद के सभी शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी है। प्रस्तुत अध्ययन हेतु न्यादर्श का चयन प्रयागराज जनपद के शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालयों में से किया है। इन महाविद्यालयों के बी0एड0 स्तर के समस्त छात्र समष्टि है तथा शोध अध्ययन के लिए चयनित विद्यार्थी न्यादर्श है। प्रयागराज जनपद के 2 शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालयों में से कुल 120 विद्यार्थियों (छात्र एवं छात्राओं) का चयन किया गया है। उपकरण के रूप में संवेगात्मक बुद्धि मापन हेतु डा0 एस0के0 मंगल एवं श्रीमती सुभ्रा मंगल द्वारा निर्मित संवेगात्मक बुद्धि मापनी तथा समायोजन के मापन हेतु डा0 रामजी श्रीवास्तव एवं डा0 बीना श्रीवास्तव द्वारा निर्मित समायोजन प्रश्नावली पुस्तिका का प्रयोग किया गया है। प्रदत्तों के विश्लेषण हेतु सह-सम्बन्ध गुणांक (कार्ल पियर्सन गुणन आर्घूण) विधि का प्रयोग किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष- बी0एड0 स्तर के विद्यार्थी की संवेगात्मक बुद्धि एवं समायोजन के मध्य सह-सम्बन्ध के अध्ययन की ओर उन्मुख रहा। इस प्रयास में विज्ञान एवं कला वर्ग के विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि तथा समायोजन के मध्य सह-सम्बन्ध को जाँचा गया। समग्र विद्यार्थियों, बालक, बालिका, कला, विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों की संवेगात्मक एवं समायोजन के मध्य सह-सम्बन्ध भी पाया गया। यह स्पष्ट हो चुका है कि संवेगात्मक बुद्धि तथा समायोजन के बीच सह-सम्बन्ध होने से व्यक्ति अपने कार्य में, जीव क्षेत्र में, अत्यधिक सफल हो सकता है तथा एक सम्यक् तथा सुचारू जीवन व्यतीत कर सकता है। इनके मध्य धनात्मक सह-सम्बन्ध होने से समाज तथा व्यक्ति दोनों को लाभ होता है। व्यक्ति का व्यक्तिगत विकास तो होती ही है साथ ही सामाजिक विकास भी होता है। शिक्षक जो कि समाज का महत्त्वपूर्ण अंग होता है उसकी विशेष जिम्मेदारी बनती है कि वह किशोर विद्यार्थियों को सही दिशा दे वह अपने ज्ञान कोश का सही से प्रचार-प्रसार करें तो आने वाली पीढ़ी देश की उन्नति में उच्चतम योगदान दे सकेगी।
मुख्य शब्द- शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थान, बी0एड0, विद्यार्थी, संवेगात्मक बुद्धि, समायोजन क्षमता, सहसम्बन्ध

Cite this Article:     डा0 विवेक कुमारसंकाय के आधार पर बी0एड0 स्तर के विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि तथा समायोजन के मध्य सह-सम्बन्धk Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, pp.92-98, March-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/

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