तेन्दूपत्ता संग्रहण के आर्थिक कारकों का विश्लेषणात्मक अध्ययन
(खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई (KCG) जिले की संग्रहण समितियों के विशेष संदर्भ में)
Author : पूर्वेश कुमार बांधव¹*, हिरेंद्र ठाकुर1, आशीष गहने2 एवं गोपाल कृष्ण यादव2
सारांश (Abstract)
प्रस्तुत शोध-पत्र खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई (KCG) जिले में तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े आर्थिक कारकों, पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव का विश्लेषण करता है। तेन्दूपत्ता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित एवं जनजातीय परिवारों के लिए ग्रीष्मकालीन अवधि में त्वरित नकद आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। उपलब्ध प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ों के आधार पर वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 की तुलना से स्पष्ट होता है कि संग्रहण दर ₹4,000 से बढ़कर ₹5,500 प्रति मानक बोरा हो गई, जिससे प्रति मानक बोरा ₹1,500 अर्थात 37.50% की वृद्धि दर्ज की गई। KCG जिले में संग्रहण मात्रा 29,500 मानक बोरा से घटकर 28,000 मानक बोरा रही, फिर भी बढ़ी हुई दरों के कारण संग्रहणकर्ता परिवारों की नकद आय क्षमता में सुधार की संभावना मजबूत हुई। बीमा दावा निपटान 112 से बढ़कर 124 परिवारों तक पहुंचा तथा उच्च शिक्षा सहायता के लाभार्थी 195 से 240+ तक बढ़े। अध्ययन का निष्कर्ष है कि तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल मौसमी रोजगार नहीं, बल्कि ग्रामीण आय, सामाजिक सुरक्षा और मानव पूंजी निर्माण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आर्थिक तंत्र है।
मुख्य शब्द: तेन्दूपत्ता, लघु वनोपज, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, KCG जिला, सामाजिक सुरक्षा, संग्रहण दर, जनजातीय आजीविका
Cite this Article:
पूर्वेश कुमार बांधव¹*, हिरेंद्र ठाकुर1, आशीष गहने2 एवं गोपाल कृष्ण यादव2, “तेन्दूपत्ता संग्रहण के आर्थिक कारकों का विश्लेषणात्मक अध्ययन (खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई (KCG) जिले की संग्रहण समितियों के विशेष संदर्भ में)” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.53-60, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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