किसानों के खाद्य फसल जोखिम प्रबंधन में कृषि बीमा की भूमिका: फसल क्षति, दावा-निपटान और आर्थिक स्थिरता का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s) :कुमार ज्योति प्रकाश1, अविनाश शर्मा2
2.सारांश
भारतीय कृषि उत्पादन अब वैश्विक स्तर पर कार्यरत लोगों के लिए किसी भी नियम या विधि के द्वारा जोखिम-आशंकित नहीं है। भारत की कृषि भी अब अकस्मात, कारक, एजेंट्स, तात्कालिक का पाठ्यक्रम / नाम नहीं है। अब उपरोक्त सभी भयावह शब्दों का उत्तर है फसल बीमा। कृषि बीमा केवल एक क्षतिपूर्ति व्यवस्था नहीं, अपितु यह संभावित/कम जोखिम (प्रिस्टम) बने रहने, आय-संतुलन, ऋण-योग्यता बने रहने, उत्पादन निर्णयों को प्रभावित करने व अन्य कई बातों में सहायक होती है। यह देश के खाद्य उत्पादन में उत्तर प्रदेश के स्थान, उसकी उत्पादन प्रचुरता व केवल दीदगी पर आधारित नरेश की सहारापुर जैसे खाद्य चावल व खाद्य फसल तालेवाले व फसल तालेवाले के प्रभावित-रूल-किरायश मुद्दों पर बल या धूनी व धूमिल परतों के उपर फसल बीमा खेलने के सृजन में सहायक है। यह बात हमारे देश में किसान क्रांति पत्रक राज्य की निर्दोष सहारापुर का ही प्रतिज्ञा
3.मुख्य शब्द: कृषि बीमा; खाद्य फसल; जोखिम प्रबंधन; फसल क्षति; दावा-निपटान; आर्थिक स्थिरता; प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
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कुमार ज्योति प्रकाश1, अविनाश शर्मा2, “किसानों के खाद्य फसल जोखिम प्रबंधन में कृषि बीमा की भूमिका: फसल क्षति, दावा-निपटान और आर्थिक स्थिरता का विश्लेषणात्मक अध्ययन” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.231-246, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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