Shiksha Samvad

Shiksha Samvad

International Journal of Multidisciplinary Research

International Open Access, Peer-reviewed & Refereed Journal | ISSN: 2584-0983 (Online)

Call for Paper: Vol. 3 – Issue 2 – December 2025 (Last Date- 31 December 2025)

इक्कीसवीं सदी के बाल उपन्यासों में पर्यावरणीय चेतना

Vol. 03, Issue 02, pp. 240–244 |  Published: 15 December 2025

Author(s): मधुलिका चैधरी एवं प्रो0 राम प्रताप सिंह

DOI:-https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i2.33

सारांश
इक्कीसवीं सदी में उपभोगवादी मानसिकता के चलते निरन्तर पर्यावरण को क्षति पहुँचाई जा रही है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, नदी-तालाब और जंगल व पहाड़ कोई भी मनुष्य की उपभोगवादी दृष्टि से बचे नहीं हैं। विज्ञान हमें ग्लोबल वार्मिंग के प्रति सचेत कर रहा है। ऐसे में साहित्यकारों की कलम इन विषयों पर चलना अत्यन्त स्वभाविक है। बाल मन में यदि पर्यावरण की समस्याओं और उनके समाधान को अच्छी तरह से स्थापित कर दिया जाए तो यही बच्चे आगे देश और समाज की इस संरचना को बचाने और उन्हें पुनः स्थापित करने का भगीरथ प्रयास कर सकते है। इस विचार के प्रकाश में साहित्य की विविध विधाओं के साथ बाल उपन्यास में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने के सुन्दर प्रयास हुए हैं।
यदि हम बाल उपन्यासों पर एक विहंगम दृष्टि डालें तो हम देखते हैं कि विनायक, उषा यादव, देवेन्द्र तथा विमला भण्डारी जैसे लेखकों ने अपने उपन्यासों में बड़े ही आकर्षक ढंग से न केवल बाल समस्याओं को रूपायित किया है बल्कि पर्यावरणीय समस्या और उनके समाधानों को बड़े सरल व सहज ढंग से शब्दों में पिरोते हुए विविध पात्रों के माध्यम से बाल मन में पर्यावरणीय चेतना को विकसित करने का सराहनीय प्रयास किया है।  बाल साहित्य की सभी विधाओं में से उपन्यास ने भी बड़ी तत्परता और जागरूकता के साथ पर्यावरण जैसी गम्भीर समस्या को बालकों के समक्ष प्रस्तुत करने में बड़ा योगदान दिया है। बाल साहित्य को यदि हम पर्यावरण संरक्षण की पहली पाठशाला बना लें तो आने वाला भविष्य बेहतर हो सकता है। 
मुख्य शब्द-पर्यावरण, बाल साहित्य, बाल उपन्यास, जंगल, बालक, साहित्यकार, मनोरंजन। 

Cite this Article:

मधुलिका चैधरी एवं प्रो0 राम प्रताप सिंह,“ इक्कीसवीं सदी के बाल उपन्यासों में पर्यावरणीय चेतनाShiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 02, pp.240-244, December 2025. Journal URL: https://shikshasamvad.com/

License

Copyright (c) 2025 shiksha samvad
Creative Commons License This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.