विकसित भारत की संकल्पना और लघु उद्योगों की भूमिका: एक भौगोलिक अध्ययन
Author : डॉ.रमन प्रकाश
सारांश
भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित विकसित भारत @2047 का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए औद्योगिक विकास, विशेष रूप से लघु उद्योगों (Small Scale Industries) का सुदृढ़ीकरण अत्यंत आवश्यक है। लघु उद्योग कम पूंजी निवेश में अधिक रोजगार सृजन करते हैं तथा ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। यह शोध पत्र विकसित भारत की संकल्पना के संदर्भ में लघु उद्योगों की भूमिका का भौगोलिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है। अध्ययन में लघु उद्योगों के क्षेत्रीय वितरण, आर्थिक योगदान, रोजगार सृजन तथा ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका का अध्ययन किया गया है। द्वितीयक स्रोतों पर आधारित इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि लघु उद्योग क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देता है। यदि आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ तो लघु उद्योग विकसित भारत के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।
बीज शब्द : विकसित भारत, लघु उद्योग, क्षेत्रीय विकास, आर्थिक भूगोल, ग्रामीण अर्थव्यवस्था |
Cite this Article:
डॉ.रमन प्रकाश, “विकसित भारत की संकल्पना और लघु उद्योगों की भूमिका: एक भौगोलिक अध्ययन” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, pp.22-28, March-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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