रीतिमुक्त काव्य घनानंद के संदर्भ में
Author: डॉ गंगेश दीक्षित
सारांश
घनानंद की रचनाओं में रीतिमुक्त काव्य का विशिष्ट स्वरूप और साहित्यिक प्रवृत्ति उभरती हैं। वे परंपरागत छंदबद्ध कविता से मुक्त होकर स्वतंत्र लय एवं आकार का प्रयोग करते हैं, जिससे कविता का स्वरूप सहज एवं प्रवाहमय हो जाता है। घनानंद के पदों में रीतिमुक्त का अर्थ परंपरागत छंदबंधनों से मुक्ति और जीवन की सहज अभिव्यक्ति है। उनकी साहित्यिक प्रवृत्ति उस युग के धार्मिक एवं सामाजिक परिवेश से प्रभावित है, जहां भक्ति आन्दोलन का व्यापक प्रभाव था। उनके पदों में भावना और सामान्य जनजीवन के अनुभवों का समावेश है, जो पारंपरिक काव्य से भिन्न है। घनानंद का काव्य साधारण और मुक्त है, लेकिन जीवन के गहरे दर्शन और नैतिकता को भी दर्शाता है। वे मीठे सहज सत्य की ओर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य शब्दसौंदर्य से अधिक जीवन के सरलतम पलों का अविष्कार करना है। उनका काव्य लोकजीवन की सरल भाषा का प्रयोग करता है, जो पाठक को सहजता और आधुनिकता का अनुभव कराता है। दार्शनिक एवं नैतिक अपेक्षाओं के संदर्भ में, उनकी रीतिमुक्त आत्मीयता और मृत्यु से जुड़े संघर्षों का चित्रण है। उनकी रचनाएँ वास्तविकता की अभिव्यक्ति की आकांक्षा से अभिमुख हैं। घनानंद की रीतिमुक्त विद्रोह नहीं, बल्कि जीवन के स्वाभाविक और सहज स्वभाव को स्वीकार करने का प्रतीक है। आलोचनात्मक विवेचन में, उनकी रीतिमुक्त को नए मानकों से समझा जाता है, जहां गेयता और साधारणता का अनुभव झलकता है। उनकी रचनाएँ विभिन्न दृष्टिकोणों को जन्म देती हैं, और वह स्थानीयता एवं नैतिकता का गहरा रंग समाहित करती हैं। अन्य रीतिमुक्त कवियों से तुलना करने पर ज्ञात होता है कि घनानंद की रीतिमुक्त अधिक लोकसंबंधित और जीवन समर्थक प्रतीत होती है। संक्षेप में, उनकी रचनाएँ नई साहित्यिक प्रवृत्ति की अभिव्यक्ति हैं, जो सामाजिक और धार्मिक परिप्रेक्ष्य में स्वतंत्रता और सहजता का संदेश देती हैं।
मुख्य शब्द: रीतिमुक्त काव्य, परंपरागत छंदबद्ध, रीतिमुक्त साहित्यिक, घनानंद ।
Cite this Article:
डॉ गंगेश दीक्षित,“ रीतिमुक्त काव्य घनानंद के संदर्भ में” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, pp.148-153, March-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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