श्रीरामचरितमानस : एक समीक्षात्मक मूल्यांकन
Author: डॉ०आभा गुप्ता
शोध सारांश-
महाकवि तुलसीदास भक्ति काल के विशिष्ट रत्नों में से एक है। इनकी प्रसिद्धि का श्रेय उनकी रसज्ञता को जाता है। तुलसी का काव्य क्षेत्र इतना व्यापक है कि उसे देखकर उनकी अद्भुत प्रतिभा पर सहज ही विश्वास हो जाता है। उन्होंने अपने काव्य में जीवन की प्रत्येक स्थिति का चित्रण किया है। तुलसी को मानव हृदय की जैसी पहचान है वैसी कम कवियों को होती है। यही कारण है कि श्री रामचरितमानस जैसे प्रबंध काव्य में सर्वत्र सरसता और विश्वसनीयता बनी रही है।
बीज शब्द-तुलसीदास, रामचरितमानस, मानवीय मूल्य, समरसता, समन्वय, वन, चित्रकूट, कैकेयी, राम आदि।
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डॉ०आभा गुप्ता,“ श्रीरामचरितमानस : एक समीक्षात्मक मूल्यांकन” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 02, pp.36-39, December 2025. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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