वैश्विक पूंजीवाद, सभ्यतागत पहचान और उभरती विश्व-व्यवस्था: एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Author : डॉ. सन्तराम पाल
सारांश:
प्रस्तुत शोधपत्र समकालीन वैश्विक समाज में शक्ति-संरचना, सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक व्यवस्था के अंतर्संबंधों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सैमुअल पी. हैटिंगटन के सभ्यतागत संघर्ष सिद्धांत, कार्लमार्क्स के वर्ग-संघर्ष, एमाइल दुर्खीम के संरचनात्मक कार्यात्मकतावाद, मैक्स वेबर के व्याख्यात्मक दृष्टिकोण तथा मिचेल फूको के शक्ति-विमर्श सिद्धांत के आधार पर यह तर्क दिया गया है कि शीतयुद्धोत्तर विश्व में वैचारिक संघर्षों के स्थान पर सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक असमानता और ज्ञान-आधारित शक्ति नए संघर्ष-आधार बन गए हैं। तकनीकी तीव्रता और वैश्विक संकट, विशेषतः कोविड-19 ने इन प्रवृत्तियों को और अधिक जटिल बना दिया है।
बीजशब्द: वैश्विक पूंजीवाद, सभ्यतागत पहचान, उभरती विश्व-व्यवस्था, वैश्विक संकट
Cite this Article:
डॉ. सन्तराम पाल,,“ वैश्विक पूंजीवाद, सभ्यतागत पहचान और उभरती विश्व-व्यवस्था: एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण”Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, pp.203-207, March-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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