जैनेन्द्र के उपन्यासों पर फ्रायड का प्रभाव
Author : डॉ.खुशबू सिंह
सारांश :
हिंदी साहित्य के प्रमुख मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार ने अपने उपन्यासों में मानव-मन की जटिलताओं, अंतर्द्वंद्वों तथा अवचेतन भावनाओं का अत्यंत सूक्ष्म एवं कलात्मक चित्रण किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र में जैनेन्द्र के उपन्यासों पर सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणवादी सिद्धांतों के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। विशेष रूप से ‘परख’, ‘कल्याणी’, ‘सुखदा’, ‘त्यागपत्र’ तथा ‘विवर्त’ जैसे उपन्यासों के पात्रों एवं घटनाओं का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि दमित कामनाएँ, कुंठाएँ, स्वप्न, मानसिक संघर्ष तथा उदात्तीकरण जैसी फ्रायडीय अवधारणाएँ उनके कथानक और चरित्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जैनेन्द्र ने बाह्य घटनाओं की अपेक्षा पात्रों के अंतर्जगत को अधिक महत्व दिया है, जिससे उनके उपन्यासों में मनोवैज्ञानिक गहराई और कलात्मक प्रभावशीलता उत्पन्न हुई है। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि जैनेन्द्र हिंदी के मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के सशक्त हस्ताक्षर हैं तथा उनके साहित्य में फ्रायडीय मनोविज्ञान का प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
मुख्य शब्द : जैनेन्द्र कुमार, फ्रायडवाद, मनोविश्लेषण, अवचेतन मन, दमित कामनाएँ, मनोवैज्ञानिक उपन्यास
Cite this Article:
डॉ.खुशबू सिंह, “जैनेन्द्र के उपन्यासों पर फ्रायड का प्रभाव” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.44-46, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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