साइबर अपराध और महिला सुरक्षा
Author: श्वेता
शोध संक्षेप
प्रौद्योगिकी की तेज़ी से बढ़ती प्रगति ने हमारे दैनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर जोखिम भी उत्पन्न हुए हैं, विशेषकर महिलाओं के लिए। महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध एक तेजी से बढ़ती वैश्विक समस्या बन चुकी है, जो उनकी सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गहरा असर डालती है। यह शोध महिलाओं को निशाना बनाने वाले विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों जैसे साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, बदला अश्लीलता, मॉर्फिंग और फ़िशिंग का विश्लेषण करता है। गुणात्मक पद्धति का उपयोग करते हुए, अध्ययन पीड़ित महिलाओं पर भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की पड़ताल करता है, जिससे यह सामने आता है, कि 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं सबसे अधिक जोखिम में हैं। निष्कर्ष यह भी बताते हैं, कि सामाजिक स्तर पर पीड़ितों को दोषी ठहराना, कमजोर कानूनी सुरक्षा और जागरूकता की कमी साइबर हिंसा को बढ़ावा देती है। अध्ययन इस बात पर जोर देता है, कि मजबूत कानूनी ढांचे, डिजिटल सुरक्षा पर बेहतर शिक्षा, प्रौद्योगिकी कंपनियों की बढ़ी हुई जवाबदेही और सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव के जरिए ही ऑनलाइन वातावरण को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है। यह शोध स्पष्ट रूप से बताता है, कि महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा केवल एक तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण मानवाधिकार और सामाजिक न्याय का विषय है।
कूट शब्द: साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, ऑनलाइन उत्पीड़न, बदला अश्लीलता, लिंग आधारित हिंसा, डिजिटल सुरक्षा, साइबर स्टॉकिंग, महिलाओं के अधिकार
Cite this Article:
श्वेता, “साइबर अपराध और महिला सुरक्षा”Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.88-98, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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