बदलते परिवेश में ग्रामीण और शहरी जीवन
Author: डाॅ. श्याम नारायण वर्मा
सारांश:
यह शोधपत्र “बदलते परिवेश में ग्रामीण और शहरी जीवन” भारतीय समाज में हो रहे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लेखक के अनुसार परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है, और ग्रामीण तथा शहरी दोनों जीवन-शैलियाँ इससे अछूती नहीं रहीं। स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार, पंचायती राज, हरित क्रांति, शिक्षा, संचार, औद्योगीकरण और सरकारी योजनाओं ने ग्रामीण समाज की पारंपरिक संरचनाओं जैसे जाति व्यवस्था, संयुक्त परिवार और जजमानी प्रथा को गहराई से प्रभावित किया। भूमि स्वामित्व अब केवल प्रतिष्ठा का एकमात्र आधार नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी ने निचले वर्गों को सशक्त किया है। दूसरी ओर तीव्र शहरीकरण ने सुविधाओं के साथ-साथ प्रदूषण, अपराध, सामाजिक अलगाव और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न की हैं। निष्कर्षतः अध्ययन दर्शाता है कि आज ग्रामीण और शहरी जीवन-शैलियाँ परस्पर घुल-मिल रही हैं, जिससे एक मिश्रित सामाजिक संरचना उभर रही है।
मुख्य शब्द: “बदलते परिवेशए ग्रामीण और शहरी जीवनए भारतीय समाज ।
Cite this Article:
डा. श्याम नारायण वर्मा“बदलते परिवेश में ग्रामीण और शहरी जीवन” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 02, pp.29-35, December 2025. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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