FLN (Foundational Literacy and Numeracy) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों द्वारा प्रयुक्त शिक्षण-पद्धतियों का पूर्व-माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के अध्ययन कौशल पर प्रभाव: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • सरिता यदु शोधार्थी, शिक्षा विभाग, श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर, (छ.ग.) Author
  • डॉ. ईश्वर प्रसाद यदु गाईड (विभागाध्यक्ष), शिक्षा विभाग, श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर, (छ.ग.) Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.12

Keywords:

FLN, Foundational Literacy, Foundational Numeracy, NIPUN Bharat, शिक्षक प्रशिक्षण, अध्ययन कौशल, पठन-बोध, संख्याज्ञान, शिक्षण-पद्धति, प्रारंभिक शिक्षा।

Abstract

Foundational Literacy and Numeracy (FLN) अर्थात् आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान वर्तमान भारतीय स्कूली शिक्षा व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षिक लक्ष्यों में से एक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने यह स्पष्ट किया कि यदि विद्यार्थी प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ने, समझने, लिखने तथा मूलभूत गणितीय अवधारणाओं को प्रभावी रूप से अर्जित नहीं कर पाते, तो आगे की शिक्षा में उनकी प्रगति प्रभावित हो सकती है। इसी दृष्टिकोण के आधार पर भारत सरकार द्वारा जुलाई 2021 में NIPUN Bharat Mission प्रारंभ किया गया, जिसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों में Grade - 3 के अंत तक आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान सुनिश्चित करना है।

               FLN केवल अक्षर पहचानने, शब्द पढ़ने अथवा संख्याओं की गणना करने तक सीमित अवधारणा नहीं है। इसमें भाषा की समझ, मौखिक अभिव्यक्ति, पठन प्रवाह, पठन-बोध, लेखन, संख्या-बोध, संख्याओं की तुलना, मूलभूत संक्रियाएँ, मापन, पैटर्न, भिन्न तथा दैनिक जीवन में गणितीय अवधारणाओं के प्रयोग जैसी क्षमताएँ सम्मिलित हैं। NCERT द्वारा आयोजित Foundational Learning Study (FLS) 2022 में इन्हीं प्रकार की foundational literacy और numeracy competencies का बड़े स्तर पर आकलन किया गया। अध्ययन में लगभग 86,000 Grade 3 विद्यार्थियों तथा 18,000 से अधिक शिक्षकों से संबंधित जानकारी प्राप्त की गई।

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Published

2026-09-05

How to Cite

FLN (Foundational Literacy and Numeracy) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों द्वारा प्रयुक्त शिक्षण-पद्धतियों का पूर्व-माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के अध्ययन कौशल पर प्रभाव: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2026). Shiksha Samvad, 4(1), 110-116. https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.12