सूफी संगीत

Authors

  • डॉ शालिनी वर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर संगीत गायन, शहीद मंगल पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मेरठ। Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.14

Keywords:

सूफ़ी संगीत, कव्वाली, कल्बाना, बाबा शेख फरीद, मर्सिया ।

Abstract

सूफ़ी संगीत विरासत हमारे हृदय की गहराइयों से जुड़ा हुआ है। सूफियों ने ईश्वर से सीधा संवाद बनाने के लिए संगीत और नृत्य का प्रयोग किया। संत निजामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो, संत बुल्ले शाह, शेख फरीद महान सूफी संत हुए हैं। सूफियाना संगीत विचारधारा की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसका आधार सामंजस्य पर टिका  है। प्रेम की ताकत से निराकार ईश्वर को प्राप्त करने की उनके अभिलाषा रही है। भारतीय उपमहाद्वीप में सूफी संगीत की अनूठी विशेषता कव्वाली , कल्बाना, नक्श निगार, रंग ,बसीत, सावन के गीत, धमाल, मंडहा, काफी गायन शैली, मर्सिया आदि गायन शैली के द्वारा प्रस्तुत की गई है।

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Published

2026-09-12

How to Cite