दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की ऊर्जा सुरक्षा की संभावनाएँ: चुनौतियाँ, अवसर एवं सामरिक विकल्प
DOI:
https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.16Keywords:
ऊर्जा सुरक्षा, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, आसियान, इंडोनेशिया, तरलीकृत प्राकृतिक गैस, महत्त्वपूर्ण खनिज, आसियान विद्युत ग्रिड, स्वच्छ ऊर्जा।Abstract
भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, औद्योगिकीकरण, नगरीकरण और परिवहन तथा विद्युत की बढ़ती माँग ने ऊर्जा सुरक्षा को केवल आर्थिक नीति का विषय न रहने देकर राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति का भी केंद्रीय प्रश्न बना दिया है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि के बावजूद भारत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आवश्यकताओं के लिए उच्च स्तर पर आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024–25 में कच्चे तेल की आयात-निर्भरता 88.2 प्रतिशत तथा प्राकृतिक गैस की आयात-निर्भरता 50.8 प्रतिशत रही। इसी अवधि में भारत ने 243.622 मिलियन टन कोयला आयात किया, जिसमें इंडोनेशिया की हिस्सेदारी 42.96 प्रतिशत थी। इस पृष्ठभूमि में दक्षिण-पूर्व एशिया भारत के लिए केवल जीवाश्म ईंधन आपूर्ति का स्रोत नहीं, बल्कि महत्त्वपूर्ण खनिज, बैटरी, सौर विनिर्माण, जैव-ईंधन, विद्युत संपर्क, ऊर्जा-वित्त और समुद्री सहयोग का उभरता क्षेत्र है। प्रस्तुत लेख वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक पद्धति तथा आधिकारिक द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दक्षिण-पूर्व एशिया पश्चिम एशिया का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता, क्योंकि आसियान देशों की अपनी ऊर्जा माँग और आयात आवश्यकता भी बढ़ रही है। फिर भी स्रोत-विविधीकरण, इंडोनेशियाई निकेल, स्वच्छ-प्रौद्योगिकी आपूर्ति-श्रृंखला, आसियान विद्युत ग्रिड से तकनीकी सहयोग, समुद्री सुरक्षा तथा हरित ईंधनों में साझेदारी भारत की दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा को अधिक लचीला बना सकती है। लेख ईंधन आयात से आगे बढ़कर समेकित ऊर्जा साझेदारी की नीति का सुझाव देता है।