अनुसंधान की उपयोगिता: ज्ञान-सृजन, सामाजिक विकास, शिक्षा, प्रशासन एवं समाज सुधार में इसकी भूमिका और महत्त्व
DOI:
https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.24Keywords:
अनुसंधान, सामाजिक अनुसंधान, नवीन ज्ञान, वैज्ञानिक विधि, सामाजिक नियोजन, समाज सुधार, समस्या समाधानAbstract
अनुसंधान ज्ञान-विस्तार, समस्या-समाधान तथा सामाजिक विकास की एक वैज्ञानिक एवं क्रमबद्ध प्रक्रिया है। प्रस्तुत लेख में अनुसंधान, विशेषतः सामाजिक अनुसंधान, की प्रकृति, विशेषताओं और उपयोगिता का विवेचन किया गया है। अनुसंधान का प्रमुख उद्देश्य नवीन ज्ञान की प्राप्ति, उपलब्ध तथ्यों एवं सिद्धांतों का पुनः परीक्षण, छिपे हुए सत्यों की खोज तथा समस्याओं का तार्किक समाधान प्रस्तुत करना है। सामाजिक अनुसंधान समाज की संरचना, सामाजिक समस्याओं, मानवीय आवश्यकताओं, आकांक्षाओं तथा सामाजिक प्रक्रियाओं को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह वैज्ञानिक विधियों के प्रयोग, कार्य-कारण संबंधों की खोज, प्रकल्पनाओं की जाँच, सिद्धांतों के पुनः परीक्षण एवं नवीन प्रविधियों के विकास में सहायक होता है। विकासशील समाजों में सामाजिक नियोजन, कल्याणकारी कार्यक्रमों, प्रशासन और समाज-सुधार के लिए विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने में इसकी विशेष उपयोगिता है। अनुसंधान अज्ञानता, अंधविश्वास और रूढ़िगत धारणाओं को कम करते हुए प्रमाणिक ज्ञान को बढ़ाता है तथा सामाजिक जीवन की बेहतर समझ विकसित करता है। इसके आधार पर वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का विश्लेषण कर भविष्य की संभावित प्रवृत्तियों का अनुमान भी लगाया जा सकता है। इस प्रकार अनुसंधान सैद्धान्तिक ज्ञान के विस्तार के साथ-साथ व्यावहारिक समस्याओं के समाधान और समाज के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास का एक आवश्यक आधार है।