शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्स्थापन: वर्तमान संदर्भ और संभावनाएँ
DOI:
https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.26Keywords:
भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भारतीय ज्ञान प्रणाली, शिक्षा, पाठ्यचर्या, शिक्षक-शिक्षा, ज्ञान का पुनर्स्थापनAbstract
भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems—IKS) भारत में विकसित ज्ञान, चिंतन, अनुभव, शास्त्रीय परंपराओं, कलाओं, भाषाओं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी अभ्यासों तथा लोक-आदिवासी ज्ञान की बहुस्तरीय विरासत को समेटती है। औपनिवेशिक काल और आधुनिक शिक्षा की संस्थागत संरचनाओं के कारण पारंपरिक ज्ञान की अनेक धाराएँ मुख्यधारा के औपचारिक पाठ्यक्रम से दूर हुईं; वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर पुनः जोड़ने की स्पष्ट दिशा दी है। प्रस्तुत शोध आलेख का उद्देश्य शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्थापन की आवश्यकता, वर्तमान संस्थागत पहलों, शैक्षिक उपयोगिता, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का आलोचनात्मक एवं रचनात्मक विश्लेषण करना है। अध्ययन वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक तथा दस्तावेज-आधारित है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रभाग की योजनाओं, शोध-केंद्रों, पाठ्यपुस्तक एवं पाठ्य-सामग्री कार्यक्रमों तथा उपलब्ध आधिकारिक सामग्री का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पुनर्स्थापन का अर्थ अतीत की यांत्रिक पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि प्राथमिक स्रोतों, भाषायी दक्षता, प्रमाण-आधारित अध्ययन, अंतर्विषयक अनुसंधान और समकालीन समस्याओं के संदर्भ में भारतीय ज्ञान की पुनर्व्याख्या है। वर्तमान पहलों में IKS शोध केंद्र, शिक्षक-प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तक-लेखन, इंटर्नशिप और ज्ञान-दस्तावेजीकरण उल्लेखनीय हैं। आलेख निष्कर्ष देता है कि प्रामाणिकता, आलोचनात्मक विवेक, भारतीय भाषाओं, शिक्षक-तैयारी और अनुसंधान-पद्धति को केंद्र में रखकर IKS का समावेशन भारतीय शिक्षा को अधिक संदर्भ-संवेदी, बहुविषयक, मूल्यपरक और नवोन्मेषी बना सकता है।