आरक्षित वर्ग एवं अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि का उनकी जीविका वरीयता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.30Keywords:
आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी, अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थी, संवेगात्मक बुद्धि, जीविक वरीयताAbstract
प्रस्तुत शोध अध्ययन का मुख्य उद्देश्य आरक्षित एवं अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि का उनकी जीविका वरीयता पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करना है। वैश्वीकरण एवं तीव्र प्रतिस्पर्धा के वर्तमान युग में यह स्पष्ट हो गया है कि केवल बौद्धिक क्षमता ही सफलता का निर्धारक नहीं है, बल्कि संवेगात्मक बुद्धि भी व्यक्ति के निर्णय, व्यवहार तथा करियर चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अध्ययन में यह मान्यता रखी गई कि सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक पृष्ठभूमि के कारण आरक्षित एवं अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के अनुभव, अवसर तथा भावनात्मक विकास में अंतर होता है, जो उनकी जीविका वरीयताओं को प्रभावित कर सकता है। इसी संदर्भ में मुरादाबाद जनपद के 800 स्नातक स्तर के विद्यार्थियों (400 आरक्षित एवं 400 अनारक्षित) को नमूने के रूप में लेकर प्रश्नावली विधि द्वारा आंकड़ों का संकलन किया गया। संवेगात्मक बुद्धि के मापन हेतु सुषमा तालेशारा की प्रश्नावली तथा जीविका वरीयता के मापन हेतु डॉ. अमित अबराहम एवं डॉ. रश्मि पन्त की प्रश्नावली का प्रयोग किया गया। प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों वर्गों के विद्यार्थियों में संवेगात्मक बुद्धि एवं जीविका वरीयता के मध्य धनात्मक सहसम्बन्ध पाया गया। अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों में यह संबंध अपेक्षाकृत अधिक सशक्त पाया गया, जो उनके बेहतर संसाधनों, पारिवारिक समर्थन एवं अनुकूल सामाजिक परिवेश के कारण संभव है। वहीं, आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों में भी सकारात्मक संबंध पाया गया, किन्तु सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों के कारण इसमें थोड़ी कम देखी गई। इस अध्ययन से यह भी स्पष्ट होता है कि संवेगात्मक बुद्धि विद्यार्थियों को आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, प्रेरणा एवं निर्णय क्षमता प्रदान करती है, जिसके माध्यम से वे अपने करियर विकल्पों का अधिक संतुलित एवं यथार्थ मूल्यांकन कर पाते हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि संवेगात्मक बुद्धि का विकास विद्यार्थियों के समुचित करियर चयन के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार यह शोध न केवल शैक्षिक मनोविज्ञान के क्षेत्र में योगदान देता है, बल्कि सामाजिक समानता एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध होता है।