आधुनिक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रामचरितमानस के नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता
DOI:
https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.38Keywords:
रामचरितमानस, नैतिक मूल्य, मानवीय मूल्य, आधुनिक समाज, मर्यादा, सामाजिक समरसता, तुलसीदास।Abstract
गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस भारतीय संस्कृति, दर्शन, लोकजीवन एवं नैतिक चेतना का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यद्यपि इसकी रचना मध्यकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में हुई, तथापि इसमें निहित मानवीय मूल्य आज के आधुनिक समाज में भी अत्यंत प्रासंगिक दिखाई देते हैं। वर्तमान समय में भौतिकवाद, व्यक्तिवाद, पारिवारिक विघटन, सामाजिक तनाव, नैतिक संकट तथा मानवीय संवेदनाओं में कमी जैसी अनेक चुनौतियाँ दिखाई देती हैं। ऐसी परिस्थितियों में रामचरितमानस में प्रतिपादित सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य, करुणा, सहिष्णुता, परोपकार, पारिवारिक उत्तरदायित्व तथा सामाजिक समरसता जैसे मूल्य मानव जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकते हैं।
यह शोध-पत्र आधुनिक सामाजिक संदर्भ में रामचरितमानस के नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है तथा यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि तुलसीदास की मूल्य-दृष्टि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में किस प्रकार उपयोगी हो सकती है।