रामचरितमानस के प्रमुख पात्रों की मनोवैज्ञानिकता : एक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.42Keywords:
रामचरितमानस, मनोवैज्ञानिकता, राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान, रावण, कैकेयी, मानवीय संवेदना।Abstract
गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस भारतीय साहित्य की ऐसी कालजयी कृति है जिसमें धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ मानवीय मनोविज्ञान का अत्यंत सूक्ष्म और प्रभावशाली चित्रण मिलता है। इसके प्रमुख पात्र केवल आदर्श चरित्र के रूप में प्रस्तुत नहीं होते, बल्कि उनके भीतर प्रेम, करुणा, त्याग, क्रोध, मोह, ईर्ष्या, भय, द्वंद्व, कर्तव्य-बोध, आत्मसम्मान तथा मानसिक संघर्ष जैसी विविध मनोवैज्ञानिक अवस्थाएँ दिखाई देती हैं। राम के व्यक्तित्व में मर्यादा, धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा और भावनात्मक संतुलन है, जबकि सीता के चरित्र में प्रेम, आत्मसम्मान, त्याग, धैर्य और मानसिक दृढ़ता का समन्वय दिखाई देता है। लक्ष्मण में भ्रातृप्रेम के साथ तीव्र भावुकता एवं आक्रोश है। भरत का चरित्र त्याग, अपराध-बोध, भ्रातृप्रेम और नैतिक आदर्श का उदाहरण प्रस्तुत करता है। हनुमान में आत्मविश्वास, निष्ठा, समर्पण और सेवा-भाव की मनोवैज्ञानिक संरचना दिखाई देती है। इसके विपरीत रावण के व्यक्तित्व में अहंकार, कामना, सत्ता-लिप्सा और आत्ममुग्धता प्रमुख हैं, जबकि कैकेयी के मन में उत्पन्न असुरक्षा, मोह और भ्रम उसके निर्णयों को प्रभावित करते हैं।
इस प्रकार रामचरितमानस के पात्र मनुष्य की विभिन्न मानसिक प्रवृत्तियों और जीवन-संघर्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य इन पात्रों की मनोवैज्ञानिक संरचना का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करना है कि तुलसीदास ने किस प्रकार मानवीय मन की जटिलताओं को काव्यात्मक रूप में अभिव्यक्त किया है।