आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक शहरीकरण के मध्य संघर्ष: वैश्वीकरण एवं पर्यटन के प्रभाव में बदलती पुष्कर नगरी का अध्ययन

Authors

  • महेन्द्र सिंह रावत शोधार्थी, समाजशास्त्र विभाग, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.32

Keywords:

पुष्कर, आध्यात्मिक विरासत, शहरीकरण, वैश्वीकरण, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट, सतत विकास, तीर्थ नगरी, समाजशास्त्रीय अध्ययन।

Abstract

पुष्कर भारत की प्राचीन तीर्थ नगरी के रूप में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखती है। यह नगर अपनी पौराणिक परंपराओं, पुष्कर सरोवर, ब्रह्मा मंदिर तथा विश्वप्रसिद्ध पुष्कर मेले के कारण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। किन्तु वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार ने इस पवित्र नगरी की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना और पर्यावरणीय संतुलन को गहराई से प्रभावित किया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य पुष्कर की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक शहरी विकास के मध्य उत्पन्न संघर्ष का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है। अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि पर्यटन उद्योग, बाजारवादी संस्कृति, होटल व्यवसाय, भूमि उपयोग में परिवर्तन तथा आधुनिक जीवनशैली ने स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्थाओं और पारंपरिक सामाजिक संबंधों को किस प्रकार प्रभावित किया है। साथ ही, पर्यावरणीय प्रदूषण, जल संकट, कचरा प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी समस्याओं का भी विश्लेषण किया जाएगा। यह शोध स्थानीय निवासियों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों तथा प्रशासनिक दृष्टिकोणों को समाहित करते हुए सामाजिक परिवर्तन की बहुआयामी प्रक्रिया को समझने का प्रयास करेगा। यह अध्ययन न केवल पुष्कर की बदलती सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करेगा, बल्कि धार्मिक विरासत और सतत शहरी विकास के मध्य संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल देगा। शोध के निष्कर्ष भविष्य में सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरणीय प्रबंधन तथा सतत पर्यटन नीति निर्माण के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

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Published

2026-09-30

How to Cite

आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक शहरीकरण के मध्य संघर्ष: वैश्वीकरण एवं पर्यटन के प्रभाव में बदलती पुष्कर नगरी का अध्ययन. (2026). Shiksha Samvad, 4(1), 283-291. https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.32