ममता कालिया के कथा साहित्य में स्त्री-स्वातंत्र्य और पारिवारिक उत्तरदायित्व का द्वंद्व: एक अध्ययन

Authors

  • प्रीतिका शोधार्थी, जयोति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.33

Keywords:

ममता कालिया, कथा साहित्य, स्त्री-स्वातंत्र्य, पारिवारिक उत्तरदायित्व, स्त्री चेतना, मध्यवर्गीय समाज, लैंगिक संबंध, आत्मनिर्णय, सामाजिक अपेक्षाएँ।

Abstract

यह शोध-सार ममता कालिया के कथा साहित्य में स्त्री-स्वातंत्र्य और पारिवारिक उत्तरदायित्व के बीच उपस्थित द्वंद्व का विश्लेषण करता है। ममता कालिया की कहानियाँ और उपन्यास आधुनिक मध्यवर्गीय स्त्री के जीवन-संघर्ष, आत्मपहचान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, भावनात्मक आकांक्षाओं तथा सामाजिक अपेक्षाओं को अत्यंत यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनकी स्त्री पात्रें स्वतंत्र जीवन, निर्णय-क्षमता और आत्मसम्मान की खोज करती हैं, किन्तु परिवार, विवाह, मातृत्व और सामाजिक मर्यादाओं से जुड़े उत्तरदायित्व उन्हें निरंतर चुनौती देते हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि लेखिका स्त्री को केवल पीड़िता के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षशील, संवेदनशील और आत्मनिर्णयी व्यक्तित्व के रूप में चित्रित करती हैं। उनके कथा साहित्य में स्त्री-स्वातंत्र्य और पारिवारिक दायित्वों का यह अंतर्विरोध समकालीन भारतीय समाज में बदलते लैंगिक संबंधों, पारिवारिक संरचना और स्त्री चेतना के गहन सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों को उजागर करता है।

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Published

2026-09-30

How to Cite

ममता कालिया के कथा साहित्य में स्त्री-स्वातंत्र्य और पारिवारिक उत्तरदायित्व का द्वंद्व: एक अध्ययन. (2026). Shiksha Samvad, 4(1), 292-302. https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.33