हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में लोक साहित्य का प्रतिनिधित्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • फतेह सिंह शोधार्थी, जयोति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय, जयपुर Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.07

Keywords:

हिन्दी पाठ्यपुस्तक, क्षेत्रीय विविधता, लैंगिक दृष्टिकोण, लोकभाषा, सांस्कृतिक मूल्य ।

Abstract

प्रस्तुत शोधहिन्दी पाठ्यपुस्तकों में लोक साहित्य का प्रतिनिधित्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर केन्द्रित है। लोक साहित्य किसी समाज की सामूहिक स्मृति, सांस्कृतिक चेतना, परम्पराओं, जीवन-मूल्यों और लोकानुभवों का जीवंत दस्तावेज है। विद्यालयी शिक्षा में इसका समावेश विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, स्थानीय परम्पराओं तथा सामाजिक विविधता से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रस्तुत अध्ययन में चयनित हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, लोकनाट्य, कहावतों, मुहावरों तथा अन्य लोक साहित्यिक रूपों के प्रतिनिधित्व का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य यह जानना है कि पाठ्यपुस्तकों में लोक साहित्य को किस प्रकार, कितनी मात्रा में और किन सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, इसमें क्षेत्रीय विविधता, लैंगिक दृष्टिकोण, लोकभाषा तथा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतिनिधित्व का भी परीक्षण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि लोक साहित्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक संवेदनशीलता, रचनात्मकता, सामाजिक चेतना और भारतीय लोकपरम्पराओं के प्रति सम्मान विकसित करने में किस प्रकार सहायक है।

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Published

2026-09-05

How to Cite

हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में लोक साहित्य का प्रतिनिधित्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2026). Shiksha Samvad, 4(1), 61-69. https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v4i1.07