भारतीय ज्ञान परम्परा के मूलाधार: हमारे परम्परागत तथा आंचलिक खेलों में नैतिक आचरण
Author : डॉ. बृजेश कुमार यादव
सारांश:
भारतीय ज्ञान परम्परा में नैतिकता एवं चरित्र निर्माण का महत्वपूर्ण स्थान है, जो परम्परागत एवं आंचलिक खेल प्रणालियों के माध्यम से प्रकट होता है। ये खेल केवल शारीरिक कौशल नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य, सामाजिक आदर्श और सदाचार की शिक्षा भी देते हैं। खेलों में नैतिक आचरण समुदाय के स्थायित्व और एकता का प्रतीक है। निष्पक्षता, सम्मान, सहिष्णुता, टीम भावना और नेतृत्व जैसे गुण इन खेलों का हिस्सा हैं। खेल नियमों का पालन और खेल भावना का सम्मान व्यक्तित्व और सामाजिक समरसता का आधार बनाते हैं। कुश्ती, कबड्डी आदि प्रेरणादायक उदाहरण नैतिक शिक्षा का माध्यम रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना और धैर्य प्रदर्शित करना इन संस्कृतियों में प्राचीन काल से विकसित होता आया है। वर्तमान में, शिक्षा प्रणाली और राष्ट्रीय खेल नीति इन मूल्यों को बढ़ावा दे रही हैं। इन खेलों का अध्ययन और पाठ्यक्रम में समावेश युवा पीढ़ी में नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी जाग्रत करता है। भारतीय खेल परंपरा की नैतिक दिशा हमें सामाजिक सद्भाव और आत्मिक उत्कर्ष के मार्ग पर कार्य करना सिखाती है, जो मानवता के नैतिक मूल्यांकन का आधार बनती है।
मुख्य शब्द: भारतीय ज्ञान परम्परा, नैतिकता, नैतिक मूल्य, सामाजिक आदर्श, खेल भावना ।
Cite this Article:
डॉ. बृजेश कुमार यादव, “भारतीय ज्ञान परम्परा के मूलाधार: हमारे परम्परागत तथा आंचलिक खेलों में नैतिक आचरण” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, pp.42-49, March-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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