जातीय समानता स्थापित करने के लिए तथाकथित उच्च जाति के महापुरुषों द्वारा किए गए प्रयासों विशेष रूप से स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रभाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s): राहुल एवं डॉ शगुफ्ता परवीन
सारांश:
भारत में जातीय भेदभाव की समस्या भारतीय समाज की प्रमुख समस्या रही है जिसने भारतीय समाज की एकता को खंडित किया है। एक कालखंड में अस्पृश्यता की भावना के साथ यह एक सामाजिक कलंक बन गई थी। जातीय भेदभाव की समस्या ने भारतीय समाज के साथ-साथ भारतीय राष्ट्र की एकता को भी विपरीत रूप से प्रभावित किया। आधुनिक भारत में जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए अनेक महापुरुषों ने प्रयास किये। इन महापुरुषों में केवल तथाकथित निम्न जाति के महापुरुष ही शामिल नहीं थे अपितु देखा जाए तो जातिगत भेदभाव का विरोध करने वाले महापुरुषों में तथाकथित उच्च जाति के महापुरुषों की भी अग्रणी भूमिका रही है। इन महापुरुषों में राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती और उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज, स्वामी विवेकानंद, महादेव गोविंद रानाडे, विनायक दामोदर सावरकर, छत्रपति शाहू जी महाराज, महात्मा गांधी आदि प्रमुख थे। तथाकथित उच्च जाति के महापुरुषों का संघर्ष इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था कि उनके द्वारा जातीय समानता का उद्घोष करने के कारण उन्हें अपनी जाति के भी विरोध का सामना करना पड़ता था।
प्रमुख शब्द: जाति, वर्ण, आर्यसमाज, शुद्धि आंदोलन, मंदिर प्रवेश आंदोलन, पुरुष सूक्त
Cite this Article:
राहुल1 एवं डॉ शगुफ्ता परवीन2,“ जातीय समानता स्थापित करने के लिए तथाकथित उच्च जाति के महापुरुषों द्वारा किए गए प्रयासों विशेष रूप से स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रभाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 03, pp.137-141, March-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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