संस्थानगत नियोजन: आवश्यकता, आयाम और प्रारुप
DOI:- https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.44
Author: डॉ. करतार सिंह
सारांश
संस्थागत योजना वह व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी शैक्षिक संस्था के उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी आवंटन एवं उपयोग करते हुए उसके लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त किया जाता है। इसमें संस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियों, रणनीतियों और कार्य-योजनाओं का निर्माण किया जाता है, जिससे शिक्षण–अधिगम की गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता तथा छात्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। संस्थागत योजना के अंतर्गत भौतिक संसाधन, मानव संसाधन, वित्तीय प्रबंधन, पाठ्यक्रम विकास, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ तथा मूल्यांकन प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं। यह योजना प्रधानाचार्य, शिक्षकों, प्रशासकों और अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयास से तैयार की जाती है, ताकि संस्था सुचारु, न्यायसंगत और प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। संस्थागत योजना न केवल संस्था के समग्र विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि इसे समाज और राष्ट्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप भी बनाती है, जिससे सतत शैक्षिक विकास संभव हो पाता है। जे.पी. नाइक ने कहा है कि संस्थागत योजना शैक्षिक योजना का एक हिस्सा है। यह एक विशिष्ट संस्था तक सीमित होती है और उस संस्था के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कार्य करती है। यह जमीनी स्तर की योजना का एक हिस्सा है। यह संस्था के पास मौजूद या प्राप्त किए जा सकने वाले संसाधनों के बेहतर और अधिक फलदायी उपयोग को सुनिश्चित करती है। संस्था ही अपनी आवश्यकताओं और हल किए जाने वाले समस्याओं को सबसे अच्छी तरह जानती है। इसलिए, संस्थागत योजना ही संस्था के कल्याण और विकास के लिए सर्वोत्तम योजना बना सकती है। (दत्ता, 2024)I
मुख्य शब्द: शिक्षा, संस्थागत योजना, शैक्षिक संस्था, संसाधन, शैक्षिक विकास I
Cite this Article:
डॉ. करतार सिंह, “संस्थानगत नियोजन: आवश्यकता, आयाम और प्रारुप” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.415- 424, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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