रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: विस्थापन, पुनर्वास और मानव भूगोल का अध्ययन
DOI:- https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.51
Author(s): 1कमलेश कुमार मीणा, 2डॉ. शारदा
सारांश
रामजल सेतु लिंक परियोजना भारत की महत्त्वपूर्ण नदी-जोड़ो योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का संतुलित उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, पेयजल उपलब्धता में वृद्धि तथा क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करना है। यद्यपि यह परियोजना आर्थिक विकास और अवसंरचनात्मक उन्नति के नए अवसर प्रदान करती है, इसके सामाजिक एवं मानवीय प्रभाव भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। प्रस्तुत अध्ययन में परियोजना के कारण होने वाले विस्थापन, पुनर्वास प्रक्रियाओं, आजीविका में परिवर्तन तथा मानव भूगोल पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि बड़े विकासात्मक परियोजनाओं से प्रभावित समुदायों को भूमि अधिग्रहण, सामाजिक-सांस्कृतिक विघटन तथा आर्थिक असुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, पुनर्वास नीतियों की प्रभावशीलता और प्रभावित क्षेत्रों में जनसंख्या वितरण, भूमि उपयोग तथा सामाजिक संरचना में आए परिवर्तनों का भी मूल्यांकन किया गया है। यह अध्ययन सतत एवं समावेशी विकास की दिशा में संतुलित पुनर्वास और सामाजिक न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
प्रमुख शब्द: रामजल सेतु लिंक परियोजना, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, विस्थापन, पुनर्वास, मानव भूगोल, भूमि अधिग्रहण, आजीविका परिवर्तन, क्षेत्रीय विकास, जल संसाधन प्रबंधन, सतत विकास।
Cite this Article:
1कमलेश कुमार मीणा, 2डॉ. शारदा, “रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: विस्थापन, पुनर्वास और मानव भूगोल का अध्ययन” Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.499- 508, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/
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