Shiksha Samvad

Shiksha Samvad

International Journal of Multidisciplinary Research

International Open Access, Peer-reviewed & Refereed Journal | ISSN: 2584-0983 (Online)

Call for Paper: Vol. 3 – Issue 4 – June 2026 (Last Date- 30 June 2026)

भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में संस्कृति, कला और सृजनात्मकता: समग्र विकास का आधार

Vol. 03, Issue 04, Pp. 532–538 |  Published: 20 June 2026

DOI:- https://doi.org/10.64880/shikshasamvad.v3i4.56

Author(s): सोनम देवी1, पिंकी यादव2

शोध सार : –

 भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृति कला और सृजनात्मकता का अतुलनीय योगदान है । भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में संस्कृति वेदों से लेकर आधुनिक काल तक के ज्ञान ,दर्शन ,कला, विज्ञान और सृजनात्मक जीवन शैली का वह पुंज है जो आध्यात्मिकता, नैतिकता और व्यवहारिक ज्ञान को जोड़ता है । भारतीय ज्ञान परंपरा की नींव वेदों, उपनिषदों ,पुराणों, शास्त्रों जैसे अर्थशास्त्र, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और लोक साहित्य में है जो न केवल आध्यात्मिक बल्कि व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान करते हैं । भारतीय ज्ञान परंपरा मनुष्य के समग्र विकास के लिए के शारीरिक ,मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक पक्षों के संतुलन पर बल देती है । संस्कृति ,जीवन शैली ,आचार विचार और परंपराओं के माध्यम से व्यक्ति को समाज से जोड़ती है । जिससे सामूहिक चेतना का विकास होता है । सृजनात्मकता  भारतीय दर्शन में प्रतिभा ,कल्पना और अनुभूति के समन्वय से उत्पन्न होती है जो नवाचार और मौलिक चिंतन को प्रोत्साहित करती है । कला संवेदनशीलता विकसित करती है । और सृजनात्मकता  समस्या समाधान व नव निर्माण की क्षमता को सुदृढ़ करती है । इस प्रकार भारतीय ज्ञान परंपरा मानव जीवन के समग्र विकास की एक समन्वित दृष्टि प्रस्तुत करती है जिसमें संस्कृति कला और सृजनात्मकता का विशेष स्थान है । प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में सांस्कृति, कला और सृजनात्मकता की भूमिका का विश्लेषण करना तथा यह स्पष्ट करना है कि किस प्रकार ये तत्व व्यक्ति और समाज के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। यह शोध दर्शाता है कि सांस्कृतिक कला और सृजनात्मकता व्यक्ति में संवेदनशीलता, नैतिकता, आत्मबोध तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करती है। वर्तमान वैश्वीकरण और तकनीकी युग में भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित कला एवं सृजनात्मक शिक्षा को अपनाकर शिक्षा, समाज और सांस्कृतिक चेतना को अधिक मानवीय, समावेशी और संतुलित बनाया जा सकता है। इस प्रकार, सांस्कृतिक कला और सृजनात्मकता भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में समग्र विकास का सशक्त आधार सिद्ध होती है।

मुख्य शब्द- भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, कला और सृजनात्मकता, समग्र विकास   

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सोनम देवी1, पिंकी यादव2,भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में संस्कृति, कला और सृजनात्मकता: समग्र विकास का आधार Shiksha Samvad International Open Access Peer-Reviewed & Refereed Journal of Multidisciplinary Research, ISSN: 2584-0983 (Online), Volume 03, Issue 04, Pp.532- 538, June-2026. Journal URL: https://shikshasamvad.com/ 

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